एक आदमी ने एक पेंटर को बुलाया और अपनी नाव दिखाकर कहा कि इसको पेंट कर दो - ANSH DARPAN

Breaking

Title of the document सभी का दिल से स्वागत करता हूं हमारे ब्लॉक में हिंदी कहानी पढ़ने के लिए हमारे चैनल के साथ बने रहे और अगर आप भी ब्लॉकिंग करना चाहते हैं तो हमें संपर्क करें
Cockroach Janata Party Support Form

क्या Cockroach Janata Party को support करते हैं?

Name:


Mobile:


Email:


शुक्रवार, 29 जून 2018

एक आदमी ने एक पेंटर को बुलाया और अपनी नाव दिखाकर कहा कि इसको पेंट कर दो

एक आदमी ने एक पेंटर को बुलाया और अपनी नाव दिखाकर कहा कि इसको पेंट कर दो। वो पेंटर पेंट ले कर उस नाव को पेंट कर दिया, लाल रंग से जैसा कि, नाव का मालिक चाहता था। फिर पेंटर ने अपने पैसे लिए और चला गया।
*अगले दिन, पेंटर के घर पर वो नाव का मालिक पहुँच गया, और उसने एक बहुत बड़ी धनराशी का चेक दिया उस पेंटर को। पेंटर भौंचक्का हो गया, और पूछा कि ये किस बात के इतने पैसे हैं ? मेरे पैसे तो आपने कल ही दे दिया था। मालिक ने कहा कि "ये पेंट का पैसा नहीं है, बल्कि ये उस नाव में जो "छेद" था, उसको रिपेयर करने का पैसा है।"पेंटर ने कहा,. "अरे साहब, वो तो एक छोटा सा छेद था, सो मैंने बंद कर दिया था। उस छोटे से छेद के लिए इतना पैसा मुझे, ठीक नहीं लग रहा है।
"*
*मालिक ने कहा,.. "दोस्त, तुम समझे नहीं मेरी बात, अच्छा विस्तार से समझाता हूँ। जब मैंने तुम्हें पेंट के लिए कहा, तो जल्दबाजी में तुम्हें ये बताना भूल गया कि नाव में एक छेद है, उसको रिपेयर कर देना। और जब पेंट सूख गया, तो मेरे दोनों बच्चे उस नाव को समुद्र में लेकर मछली मारने की ट्रिप पर निकल गए।मैं उस वक़्त घर पर नहीं था, लेकिन जब लौट कर आया और अपनी पत्नी से ये सुना कि बच्चे नाव को लेकर, नौकायन पर निकल गए हैं, .. तो मैं बदहवास हो गया। क्योंकि मुझे याद आया कि नाव में तो छेद है। मैं गिरता पड़ता भागा उस तरफ, जिधर मेरे प्यारे बच्चे गए थे। लेकिन थोड़ी दूर पर मुझे मेरे बच्चे दिख गए,
जो सकुशल वापस आ रहे थे। अब मेरी ख़ुशी और प्रसन्नता का
आलम तुम समझ सकते हो। फिर मैंने छेद चेक किया, तो पता
चला कि मुझे बिना बताये तुम उसको रिपेयर कर चुके हो। तो  ..मेरे दोस्त,.. उस महान कार्य के लिए, तो ये पैसे भी बहुत थोड़े हैं। मेरी औकात नहीं कि उस कार्य के बदले तुम्हे ठीक ठाक पैसे दे पाऊं।"*
*इस कहानी से हमें यही समझना चाहिए कि भलाई का कार्य हमेशा "कर देना" चाहिए, भले ही वो बहुत छोटा सा कार्य हो। क्योंवो छोटा सा कार्य किसी के लिए "अमूल्य" हो सकता है।*

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें